Tuesday, July 1, 2008

गणित ने बचाई जान (बातें गणित की भाग... IV)

आज बात ऐसी... जिसमें गणित ने एक व्यक्ति की जान बचाई। वो भी किसी साधारण नहीं, ऐसे व्यक्ति की जिसे आगे चलकर नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया. जी हाँ आप को गणित से डर लगता है वो तो ठीक है पर आज ये प्रसंग सुन लीजिये, इसके बाद शायद आप गणित की महत्ता तो मानेंगे ही.

बात है रुसी क्रांति के समय की... सोवियत रूस के गणितीय भौतिकी (Mathematical Physics) के विद्वान इगोर टैम (Igor Tamm) को दक्षिणी उक्रेन के ओडेसा के समीप एक गाँव में साम्यवाद विरोधी (Anti-Communist) गिरोह ने धर दबोचा. उन्हें उक्रेन विरोधी साम्यवादी समझकर वो उन्हें अपने सरगना के पास ले गए...

सरदार ने पूछा: 'जीविका चलाने के लिए क्या करते हो?'
'जी, गणितज्ञ हूँ... !' [ बेचारे ठहरे गणित पढने-पढाने वाले... धर्मेन्द्र तो थे नहीं कि सरदार का खून ही पी जाते :)]
'हम्म...' [अगर गब्बर होता तो: साम्भा की तरफ़ देखकर सोचता... साम्भा की जगह इसी को रख लेते हैं हमारा काम करेगा, साम्भा आजकल बहुत घपला करता है आदमी और गोली गिनने में :-)]

पर कमाल की बात ये थी की ये सरदार पढ़ा-लिखा था और वो भी गणित जानता था.
सरदार बोला: 'ठीक है... किसी फलन (function) के टेलर श्रेणी (Taylor Series) के n स्थानों तक अनुमान लगाने में जो त्रुटी होगी, वो बता दो तो तुम्हे छोड़ दिया जायेगा नहीं तो तुम्हे गोली मार दी जायेगी'.

टैम साहब ने कांपती उंगुलियों से जमीन की धुल में त्रुटी निकाली, सरदार ने उत्तर देखा और कहा की इसे जाने दो.
[मोगैम्बो खुश हुआ !, और सरदार का वादा था तो मुकर जाने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता]

सन १९५८ में टैम साहब को नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया... उन्हें जीवन भर उस दस्यु-सरगना का पता तो नहीं चल पाया... पर छात्रो को गणित की उपयोगिता बताने के लिए ये कहानी जरूर अमर हो गई.

चित्र साभार: नोबेल पुरस्कार वेबसाईट


ये कहानी मेरे मित्र और ऑफिस में सहकर्मी अजित बुरड ने मेरी गणित वाली श्रृंखला पढने के बाद भेजी, मैंने अनुवाद करके पोस्ट ठेल दिया. इसके अलावा गणित की शुद्धता वाली पोस्ट पर ये चुटकुला भी उन्होंने भेजा है और अपने ब्लॉग पर भी डाला है. आप भी देखिये.


अजित कम्प्यूटर साइंटिस्ट हैं, और ज्यादातर टेक्नीकल चीज़ों पर लिखते हैं उनकी वेबसाइट और अंग्रेजी में ब्लॉग आप यहाँ देख सकते हैं गणित में भी अच्छी रूचि रखते हैं. हाँ एक और बात अगर आप कोटा या जयपुर से हैं तो आज से ठीक ५ साल पहले यानी २००३ में आपने उनकी तस्वीर अखबार में देखी होंगी... कारण IIT की संयुक्त प्रवेश परीक्षा २००३ में टॉप १० में से एक थे, आशा है इस जानकारी के लिए वो नाराज नहीं होंगे ... बिना उनकी इजाजत के ही लिख रहा हूँ, अगर उनको आपत्ति होगी तो हटा दी जायेगी तब तक आपने पढ़ लिया तो ठीक :-)



इस बीच दिनेशराय द्विवेदीजी की एक हौसला बढाती हुई e-चिट्ठी मिली, बहुत आभार उनका. मसिजीवीजी ने भी ये पोस्ट ठेल डाली उनका भी आभार. इस सप्ताह अनुप्रयुक्त गणित के कुछ उदहारण लिखने वाला था अपने किए कुछ अलग-अलग कामों में से... वो अगले पोस्ट में. समयाभाव के इस सप्ताह के लिए बस इतना ही.

अगर गलती से टेलर श्रेणी में त्रुटी अनुमान जानने की इच्छा हो तो यहाँ देख लें. :-)

~Abhishek Ojha~

14 comments:

  1. टैम साहब वाला किस्सा बड़ा दिलचस्प लगा. आभार.

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  2. बस, इतना ही कामना है कि कोई गिरोह धर न ले। फलन के टेलर सीरीज तो न बता पायेंगे!:)

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  3. शानदार आलेख! गणित और गणितज्ञों के बारे में जानने की क्षुधा कभी समाप्त नहीं होगी। ऐसी ही एक घटना एक और गणितज्ञ के बारे में है। नाम अभी स्मरण नहीं हो रहा है। स्मरण हो आने पर बताता हूँ।

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  4. इतना पढ़ा लिखा सरदार मिले तो हम भी गेंग ज्वाइन कर लें.

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  5. ऐसा गणितप्रिय सरगना तो कभी नहीं देखा पर ऐसे कई कम्‍यूनिस्‍ट मित्र हैं जिन्‍हें ऐसा कोई सरगना टकरा गया तो वे मरना ज्‍यादा पसंद करेंगे- समीकरणों में उलझने की तुलना में। :)

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  6. वाह क्या सरगना है ..कुछ सवाल तो ऐसे थे जैसे की जीविका चलाने लिये क्या करते हो ....जी लेखक हूँ....गणित का पंडित तो कमा लेगा ....आजकल तो इंटर नेट पर टूशन भी है.....पर कुल मिलाकर मजा आ गया...

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  7. जब से आपकी क्‍लास अटेंड कर रहा हूं, गणित की महत्‍ता तो उसी समय से मानने लगा हूं। वो सरगना कहीं आईआईटी का प्रोडक्‍ट तो नहीं था।

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  8. यूँ तो हम इस विषय से डरने वाले नहीं। पर ये प्रसंग रोचक लगा।

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  9. हा हा सांभा गिनती ग़लत कर रहा है.. ये सही है.. अब तो गणित की कक्षा दिलचस्प होती जा रही है

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  10. अरे वाह कया बात हे, भगवान का धन्यवाद सरदार पढा लिखा था, अति सुन्दर जान कारी

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  11. bahut hi shaanadar rochak post .bhai anand gaya . dhanyawaad.

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  12. ऐसे सरगना की तो हमें भी तलाश है।

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